मैं उस पीढ़ी में पैदा हुआ जिसे सबसे पहले भाषाओं ने ठगा
रवि प्रकाश की तीन कविताएं और उन पर उस्मान खान की टिप्पणी
रवि प्रकाश की तीन कविताएं और उन पर उस्मान खान की टिप्पणी
लंबे समय तक नस्लवाद और लिंगविशेष के वर्चस्व में रहने के कारण विरासत में मिले इस इतिहास में वे अपने लिए बनी बेहद अजीब और अपमानजनक छवियों को बगल में दबाए हुए जिए जा रही थीं.
फिर लिखना तो मेरे लिए जिन्दा होने का सबूत है और मनुष्य होने का भी.
रंगमंच का माहौल डरपोक, लिजलिजे और चंपू किस्म के लोगों से भरा हुआ है, जिनको अपनी कला और पुरूषार्थ से अधिक अपनी चमचई और कैनवासिंग पर भरोसा है, इसके लिए वो अपनी राह बनाते भी है और दूसरों की राह खोदते भी हैं.