केदारनाथ सिंह: शोक का सर्कस में बदल जाना
केदारनाथ सिंह जैसी कविता लिखने के चक्कर में कितनी भ्रूण हत्यायें हुई हैं – इसका कोई हिसाब नहीं. उदय प्रकाश का उदाहरण सबके सामने है, जो केदारजी जैसी कविता लिखने के चक्कर में कहानी के घाट जा लगे.
केदारनाथ सिंह जैसी कविता लिखने के चक्कर में कितनी भ्रूण हत्यायें हुई हैं – इसका कोई हिसाब नहीं. उदय प्रकाश का उदाहरण सबके सामने है, जो केदारजी जैसी कविता लिखने के चक्कर में कहानी के घाट जा लगे.
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आप, मैं और वे चरित्र, जो पन्नों पर जन्म लेते हैं – ज़्यादातर समय हम अभिव्यक्तिहीन, अविश्वसनीय, भ्रामक, गोलमोल, अवरोधकारी और बेमन के होते हैं. लेकिन इनके बाहर भाषा संभव है.
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